इस छोटी सी जिन्दगी के, गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सब को अपना कह सकूँ, ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर, फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का, मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर, दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा, नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने, दूना लौटाना चाहता हूँ..
एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं..
दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है..
दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं, मैं..
जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं, मैं..
वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना..
तन्हाई साथ है मेरे, इतना बताना चाह्ता हूं..
ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं, मैं..
बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं, मैं..
एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं, मैं..
खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं, मैं
Zindgi vo Geet hai ,
jo har saaz par gaya nhi jata.
ye vo raaz hai,
jo samgh kar bhi samghaya nhi jata...
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